आईना-ए-शहर - अब्दुल मजी़द
संयंत्र से जुडे मुद्दों का निपटारा यों नहीं
संयंत्र से जु़डे हुई कई मु े इन दिनों चर्चा में हैं, जिनका निपटारा करने में संयंत्र प्रबंधन कोई रूचि नहीं दिखा रहा है. सबसे बड़ा मु ा तो हाउसिंग लीज का है. लोगों का यह भरोसा है कि हाऊस लीज का छठवां चरण जल्दी ही आएगा. जिन संयंत्र कर्मियों ने अभी तक अपना मकान नहीं बनाया है, उसका लाभ उन्हें मिलने की उम्मीद है. अपने घर का सपना संजोए कई संयंत्र कर्मी यह चाहते हैं कि सेल जल्दी से जल्दी छठवीं हाऊस स्कीम लागू करे और वे अपने सपने को साकार कर सकें. जिस तरह लोगों को छठवीं स्कीम के आने का इंतजार है, उससे लगता है कि स्कीम के लागू होते ही मकान धक-धक बिक जाएंगे और इसे सेल को भी कराे़डों का फायदा पहुंचेगा.
ऐसा भी सुनाई पड़ रहा है कि छठवीं हाऊस लीज स्कीम में पूर्व संयंत्र कर्मियों को भी शमिल किया गया है. पूर्व संयंत्र कर्मियों जिनका कोई घर बार नहीं है, और वह रिटायर्ड हो गए हैं और जिन्होंने छत्तीसगढ़ खासकर भिलाई को अपना घर समझ लिया है, यदि इस स्कीम मंे शामिल किया जा रहा है तो यह उनके लिए वरदान साबित होगा.
पूर्व संयंत्र कर्मियोें के साथ ही साथ संयंत्र प्रबंधन ने इस बार उदारता का परिचय देते हुए कुछ पत्रकारों को भी मकान आबंटित कने का निर्णय लिया है. यह संयंत्र प्रबंधन का स्वागतेय कदम है और इसकी जितनी सराहना की जाए कम है. लेकिन संयंत्र प्रबंधन ने पत्रकारों को मकान देने का जो पैमाना निर्धारित किया है, वह कुछ विरोधाभासी है. संंयंत्र प्रबंधन का जनसंपर्क इस बात से बखूबी परिचित है कि कौन सा पत्रकार यहाँ कितने सालों से किस पेपर का प्रतिनिधित्व कर रहा है. पत्रकार को मकान न देकर मकान अखबार के नाम से एलाट करना समझ से परे है. जनसंपर्क विभाग प्रबंधन को रिपोर्ट दे सकता है कि कौन सा पत्रकार मकान लेने की पात्रता रखता है.इसमें पारदर्शिता रखने की जरूरत है, योंकि बहुत से प्रतिबद्ध पत्रकार पहले ही साडा द्वारा पत्रकारों को दिए गए भूखंड में बरते गए भेदभाव का दंश झेल चुके हैं. तब भी बहुत सारे अपात्र और बाहरी पत्रकारों के भूखंड हथिया लिए थे और उन्हें मदद करने वाले कुछ तथा कथित लोग ही थे. कम से कम इस बार ऐसा अन्याय और भेदभाव न होने पावे, इसका पैमाना तय किया जाना चाहिए.
जहाँ तक हाऊस लीज का मामला है,सेल में छठवीं स्कीम की योजना परित हुई हो या न हुई हो, यह जिले के बिल्डरों के लिए एक करारा झटका है. यदि स्कीम लागू होती है तो बिल्डरों को इससे भारी नुकसान होनाा लाजिमी है. अत: बिल्डर यह कभी नहीं चाहेंगे कि यह स्कीम आए और लागू हो.
बीएसपी मंे मेडिकल अनफिट कर्मी के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देेने का का मामला भी वर्षों से खटाई में पड़ा हुआ है. वर्तमान में कैंसर, किडनी और अन्य घातक बिमारियों से पीड़ित कर्मचारियों के परिवार को संयंत्र प्रबंधन नौकरी देने पर विचार कर रहा है. इनमें से कई ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिन्हें अब तक फैमिली बेनीफिट का लाभ भी नहीं मिल रहा है.इन तमाम मु ों और समस्याआें का निदान जल्दी होना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सकें.
मजदूरों की मौत के मायनेपुरैना में निर्माणाधीन एनएस पीसीएल के पावर प्लांट में फिर एक मजदूर की मौत हो गई. अब तक इस पावर प्लांट में पाँच मजदूरों की मौत हो चुकी है. इस पावर प्लांट में निर्माण कार्य प्रारंभ होते ही हादसों का दौर शुरू हो गया है. कई घायल हुए मजदूरों की न तो कोई सुध लेने वाला है और न ही हो पाती है. दरअसल यह देखने वाली बात है कि उद्योगों में दुघर्टनाएं होती ही यों हैं? मजदूरों को काम करते समय सभी सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं या नहीं, यह देखने की फुर्सत भला किसे है? दुघर्टनाआें का कारण या है, यह बात तो जाँच के बाद भी कभी सामने वहीं आ पाती. घायल या मृतक मजदूर के परिजनों को बस कफन-दफन का इंतजाम करके भाग्य के भरोसे छाे़ड दिया जाता है. इस बात की जवाबदेही तय नहीं की जाती कि मजदूर को मौत का जिम्मेदार कौन मजदूर की लाश पर थाे़डा बहुत काम बंद कर देने से कंपनी या ठेकेदार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. आखिर घायल का इलाज या मजदूर की मौत के बाद उसके परिजनों को दो वक्त की रोटी का जरिया देने की जिम्मेदारी जब तक तय नहीं की जाएगी, तब तक दुघर्टनाएं होती ही रहेगी. आखिर इन दुघर्टनाआें को रोकने के या प्रयास हुए यह कौन बताएगा.
छत्तीसगढ़ियों की उपेक्षा चिंतनीय
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम स्वप्रदृष्ट ा स्व. डा. खूबचंद बघेल की जयंती व छत्तीसगढ़ी राज भाषा संप्रेषण पर पिछले रविवार को राघवेंद्र राव सभा भवन में समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपनेता प्रतिपक्ष व पूर्वमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ियों की उपेक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि रोजगार ही नहीं, हर क्षेत्र में उनकी उपेक्षा की जा रही है. वास्तव में अलग राज्य बनाने का उ ेश्य अभी पूरा नहीं हो पाया है. श्री बघेल ने पाइवेट मंे बिल द्वारा फ्ब्भ् के तहत छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए उन्होंने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. कार्यक्र्र म की अध्यक्षता कर रहे साधुलाल गुप्ता ने छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल से ननकीराम कंवर को बाहर करने पर आपत्ति जताई. विशिष्ट अतिथि श्यामलाल चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने से पहले इस भाषा को बोलने और लिखने पर जोर दिया. उन्हांेने स्व. बघेल के उ ेश्यों के अनुरूप कार्य करने की जरूरत बताई और इसके लिए नौजवानों से आगे आने का आहवान किया. डा.परदेशी राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ व्याकरण, हिंदी से पहले बन चुका था. अलग-अलग क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ी भाषा की विभिन्नता को ज्यादा तूल ने देने की बात कहीं. आभार प्रदर्शन एसएल साहू ने किया.
क्राइम जोन
छत्तीसगढ़ पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण का गठन
रायपुर. प्रदेश सरकार राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण का गठन कर उन पुलिस अफसरों और कर्मियों की जवाबदेही तय करेगी जिनके विरूद्घ शिकायत की जाती है. इस प्राधिकरण के पास सिविल न्यायलय जैसे अधिकार होंगे, जो मामलों की सुनवाई कर जवाबदेही तय करंेगे. चार सदस्यीय इस प्राधिकरण में एक महिला सदस्य भी अनिवार्य रूप से शामिल रहेगी. प्राधिकरण अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौंपेगा.
राज्य पुलिस ए ट में थाे़डे संशोधनों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह प्राधिकरण गठित किया जा रहा है. इसमें पुलिस के विरूद्घ होने वाली सभी शिकायतों को सुनवाई के लिए इस प्राधिकरण में सभापति उच्च न्यायलय के सेवानिवृत न्यायधीश या उच्च न्यायिक सेवा के सेवा निवृत्त न्यायधीश होंगे. एडीजी स्तर से सेवानिवृत्त हुए पुलिस अधिकारी के साथ न्यूनतम सचिव श्रेणी के सेवा निवृत्त लोक सेवक के साथ प्रदेश के किसी एक प्रतिष्ठित समाज सेवी व्यक्ति को इसमें शामिल किया जाएगा. इन सभी का कार्यकाल दो वर्ष का होगा. इनमें से किसी को समयपूर्वक हटाने के लिए प्राधिकरण की सिफारिश पर तीन चौथाई बहुमत के आधार पर सरकार द्वारा हटाया जा सकेगा. प्राधिकरण मुख्य रूप से शिकायतकर्ताआें की ओर से शपथपत्र के साथ प्रस्तुत शिकायत करने पर या फिर सरकार द्वारा सौंपे गए आवेदनों आरोपों की जांच करेगा. यह संबंधित व्यक्ति को संमन जारी करके हाजिर रहने के आदेश जारी कर सकता है.
किसी घटना के छह माह बीत जाने के बाद प्राधिकरण संज्ञान नहीं लेगा. दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करने का अधिकार भी प्राधिकरण को होगा. राज्य सरकार के प्रतिवेदन प्रस्तुती करने के साथ ही प्राधिकरण जहां उचित समझे वहां सिफारिश कर सकता है. ऐसे मामले जिनियर मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएं जांच कर रही हों, या न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन हों, वहां प्राधिकरण संज्ञान नहीं लेगा.
विचार मंथन
संपादकीय
शुभ विचार
जो दूसरों को जीतता है, वह बली है, लेकिन जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह महाबली है.
-लाओत्जे
बारास्ता अब्दुल कलाम
पूर्व राष्ट ्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने पाँच साल के कार्यकाल में जहाँ मानवीय सवेदनाआें का नया इतिहास रचा वही उन्होंने इंसानियत की कई परिभाषा गढ़ी है. देश ग्यारहवें राष्ट ्रपति के दायित्व से मुक्त हुए एपीजे अब्दुल कलाम देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद संंभवत: ऐेेसे पहले शीर्ष नेता हैं जो बच्चों में बेहद लोकप्रिय रहे और जिन्हें बच्चों ने अपने बहुत करीब पाया. वे अपने कार्यकाल के दौरान जहां भी गए,बच्चों से घिरे रहे. वे बच्चों की मासूम जिज्ञासाआें को बड़े ही सरल तरीके से शांत करते रहे. वे इस बात की गंभीरता को जान चुके थे कि इस पृथ्वी पर सबसे बड़ा संसाधन युवा वर्ग है. देश का यही युवा वर्ग विज्ञान एवं प्रौद्योगिक क्षेत्र में भारत को आगे ले जाने में मददगार साबित होगा. आचार्य रजनीश ने एक बार देश के प्रथम राष्ट ्रपति सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन के संदर्भ में कहा था कि एक शिक्षक का राष्ट्रपति बन जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, आश्चर्य तो तब होगा जब कोई राष्ट्रपति शिक्षक बनें. हालांकि डा. कलाम ने बिहार के नालंदा विश्व विद्यालय, तमिलनाडू के गांधी विश्वविद्यालय और तिरूवनंतपुरम अंतरिक्ष विश्व विद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पढ़ाने की स्वीकृति दी है, पर अपने पाँच साल के कार्यकाल में इस मिसाइल मैन ने देश को कई अच्छी शिक्षाएं दी और बेहतर रास्ते पर चलने का पाठ पढ़ाया.
भारत को विकसित देश का दर्जा सन ख्०ख्० से पहले ही मिल जाने का भरोसा रखने वाले कलाम जाते-जाते भी देश को दस ऐसे सूत्र दे गए जिससे बेहतर छवि दुनिया के सामने रख सकते हैं. अपने विदाई संबोधन में उन्हांेने सच ही कहा कि देश के कोने-कोने में छोटे पैमाने पर ऐसे साहस पूर्व और प्रेरणादायक प्रयोग चल रहे हैं जिन्हें राष्ट ्रीय स्तर पर व्यापक सहभागिता के साथ चलाए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शहरों और गांवों के बीच असमानता खत्म होनी चाहिए. देश में ऊर्जा और पेयजल उपलब्ध कराया जाना चाहिए. कृषि सम्यक तालमेल होना चाहिए. किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी को आर्थिक या सामाजिक कारण से शिक्षा के अवसर से वंचित न होना पड़े. भारत ऐसा देश बने जिसमें सर्वश्रेष्ठ विद्वान, वैज्ञानिक और निवेशकर्ता आना चाहें. सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हों. प्रशासन जिम्मेदार, पारदर्शी और भ्रष्ट ाचार मुक्त हो. महिलाआें और बच्चों के खिलाफ कोई अपराध न हो. समृद्ध, सुरक्षित, स्वास्थ्य, शंातिपूर्ण और खुशहाल भारत हो और यह एक ऐसा देश बने जो दुनिया में रहने की सबसे अच्छी जगह हो और लोगों को अपने नेताआें पर गर्व हो. निश्चित ही एक सच्चा शिक्षक ही ऐसा रास्ता बता सकता है. उन्हें राष्ट ्र निर्माण में सभी लोगों और संस्थानों को शामिल करने और समाज के हर तबके को सशक्त बनाने की फिक्र भी थी. ऐसे राष्ट ्रपे्रमी व्यक्ति को निश्चित ही दूसरा कार्यकाल मिलना चाहिए था, लेकिन टुच्पी राजनीति की बेरहम खरोंचे इतनी निर्दयी होती हैं इंसान की ईमानदारी, सच्चाई और दया भाव दूसरों के लिए खटकने लगती हैं. कलाम भी इसी बेरहम राजनीति का शिकार हो गए, अन्यथा उन्हें दूसरा कार्यकाल यदि मिलता तो वे देश के लिए काफी कुछ कर सकते थे. फिर भी जितना कुछ उन्होंने किया उसके लिए देश उन्हें सदा एक बेहतर राष्ट ्रपति के तौर पर याद करता रहेगा. देश का अगला राष्ट ्रपति एक महिला को बनाया गया है. कहा जाता है कि महिलआें में मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक मर्यादाआें का भान कुछ ज्यादा ही रहता है. श्रीमती प्रतिभा पाटिल को इस बात का श्रेय भी जाता है कि वे आजाद भारत की पहली महिला राष्ट ्रपति बनी हैं. महिलाआंे, बच्चों और समाज के उत्पीड़ित तबकों के लिए वे और भी अच्छा और बेहतर कर सकंेगी, यही आशा है.
भाजपा, कारवां गुजरा लेकिन गुबार बाकी
ध्रुवनारायण अग्रवाल
किसी भी राजनीतिक दल में विशेषकर जब वह सत्ता में हो तब पार्टी नेताआें मे से कुछ के विरोध, असंतोष और मतभेद कोई नई बात नहीं होती जब तक कि विरोध विद्रोह का रूप् धारण न कर ले.पार्टी प्रमुख या मुख्यमंत्री उसकी, उन लोगों की परवाह भी नहीं करते डा. रमन सिंह भी अपने कुछ असंतुष्ट विधायकों की उछल-कूद से बेफिक्र हैं ननकीराम को मंत्रीमंडल से हटाए जाने या अमर की घर वापसी से उठे इस विवाद को वे फिलहाल प्याली में तुफान से अधिक महत्व नहीं दे रहे हैं और कह रहे हैं कि गार्जियन से अपनी बात कहने में या हर्ज है. इन असंतुष्ट ों को और भी तरीके से संतुष्ट करने के लिये भाजपाा शासन और संगठन में अभी भी बहुत सी कुर्सिया खाली है.
नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में विशुध्द भाजपा सरकार के नं. वन तमगा प्राप्त मीडिया के सर्वेक्षण के अनुसार मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के खिलाफ उनकी ही पार्टी में विरोध के स्पर बार-बार उभर रहे हैं. इस बार भी श्री ननकी राम कंवर को मंत्री पद से अलग करके उन्होंने अपने ही घर में कलह पैदा कर दी है. रमन सरकार की कार्यप्रणाली से स्पष्ट सिर्फ म् ही विधायक दिल्ली पहुंच सके, तैयारी तो ख्ख् को ले जाने की थी और जिन्होंने पार्टी अनुशासन के दायरे में रहते हुए तीर्थ यात्रा कर बहाना बनाकर रमन सिंह की शिकायत पार्टी आला कमान से कर आये. राजनीति के पंडितों काा यह कथन कि यदि सिर्फ क्त्त् भाजपाई विधायक फूट गये तो रमन जी की कुर्सी गई, यह तो अभी संभव प्रतीत नहीं होता योंकि अन्य संतुष्ट ों को पार्टी हाईकमान के इस मामले में ठंडे व्यवहार से निराश ही होना पड़ा है किंतु उनके लिये कोई अनपेक्षित नहीं था, वास्तव मं वे दिल्ली में आगाज करना चाहते थे.अंबिकापुर बैठक में भी असंतुष्ट ों को सिर्फ अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया. अंबिकापुर बैठक में असंतुष्ट ों का गुबार शांत नहीं हुआ है. भाजपाई विरोध का कारवाँ तो फिलहाल गुजर समझा जाना चाहिये परंतु धूल गुबार तो अगले आम चुनाव तक उड़ती ही रहेगी. यद्यपि सुलह-सफाई और मान- मनौव्वल का दौर भी चलता रहेगा इसके लिये पार्टी हाईकमान ने सौदान सिंह और छत्तीसगढ़ पार्टी कर रखा है फिर भी या यह अंतर्कलह शांत हो सकेगा. आज यदि जोगील फामूला काम आता जिसमें दलबदल की गुंजाइश हो तो या इन सात असंतुष्ट विधायकों को पार्टी अध्यक्षकी घु़डकी सहनी पड़ती और या आडवाणी जी तथा अटलजी इनसे मुलाकात करने में इंकार कर सकते थे.
अब हम आते हैं उन अरोपांे पर जो उनके ही इन कमजोर दिल वाले विधायकों ने लगाये हैं कमजोर दिल वाले इसलिये कि इन्हांेने अपना शक्ति प्रदर्शन नहीं किया शायद टिकिट कट जाने का भय है.
आदिवासी कार्ड ख्ेाला जा चुका है. रमन जी अपनी पत्ता खोल नहीं रहे हंै परंतु खलबलाहट तो है ही जिसकी आज प्रतिपक्षी काँग्रेसियो तक पहुंच रही है. शासन और संगठन के बीच तालमेल बनाये रखने के आदर्श वा य पुराने पड़ गये है. जो खबरे छनकर बाहर आयी है. उनके अनुसार तो रमन जी भी अपनी घर सम्हालने भाईयों, को समेटे रखने और पुत्रों को समझाइश देने में लग गये हैं. समाचार है कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि असंतुष्ट विधायकों के आरोपों की सत्यता एवं प्रमाणिकता की जाँच करके एक रिपोर्ट तैयार की जाये. यह एक जवाब होगा, स्पष्ट ीकरण होगा, जिसे लेकर रमनजी दिल्ली उड़ जायेंगे और राजनाथ सिंह के समक्ष रखकर उनका फिर से एक बार आशीवार्द प्राप्त करते. समाचारों के अनुसार असंतुष्ट ों ने कोई ठोस आरोप प्रस्तुत नहीं किये, सिर्फ इतना ही कहा कि सरकार अफसरशाही की गोद में चल गई है. कुछ अधिकारी उनकी कुछ सुनते हैं कुछ नहीं. सांसद रमेश बैश जो अपने को इस झगड़े से दूर ही रख रहे हैं, सिर्फ इतना कहकर अपना पल्ला झाड़ लिये कि जब कोई कुछ सुनता ही नहीं तब या किया जाये. उनकी यह टिप्पणी असंतुष्ट ों को हतोत्साहित करने वाली तो नहीं अपितु की पुटि करने वाली है.
ननकीराम के तेवर अवश्य उग्र हैं, उन्होंने पुन: मंत्रिमंडल मेें प्रवेश का आफर ठुकरा दिया है जो स्वयं राजनाथ सिंह ने उन्हंंे संतुष्ट करने के लिये दिया.आदिवासी सासंद और विधायक, लालमबंद हो रहे हैं यही मौका है कि राज्य में कांग्रेेस पार्टी, जो दमदार नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है, मौके का फायदा उठा सकती है. कांग्रेेस में जोगी गुट, मोतीलाल वेाा का गुट खेमेबाजी में लिप्त है. जब अने ही घर के अंागन में दीवार खड़ी हो तो अगला विधानसभा आम चुनाव जीतने के लिये कांग्रेस को यह दीवार गिरानी ही पड़ेगी. अन्यथा, खैरागढ़ मालखरौदा चुनाव परिणाम की पुनरावृत्ति भी हो सकती है. भाजपा की भी सारी कसरत अगले चुनाव के लिये हो रही है. इस चुनावी दंगल में बाजी मारने के लिये यही उपयुक्त समय है.
ांग्रेस के लिये सबक यही है कि किस इन दि टूबल वाटर जब दुश्मन मुसीबत में हो तभी वार करो. राजनीति और विशेषकर प्रजातंत्र में राजनीति का चुनावी गणित यही कहता है कि मतदाता परिवर्तन चाहता है. हमारा भी यही अनुभव रहा है कि सता बदली है, जिस पार्टी की भी सरकार रही हो उसे अगले चुनाव मे रिजे ट किया गया है. उसकी विकास योजनायें कोई काम नहीं आती. अब वो जमाना लद गया जब कांग्रेस ने ब्० वर्षों तक सारे देश में निर्द्वंद्व और बेखौफ शासन किया योंकि जनता के समक्ष कोई और विकल्प भी नहीं था. आज के राजनीतिक दल जो स्वाधीनता काल की उपज है, धाकड़ कांग्रेसियों के मुकाबले बौने पड़ रहे थे, आज स्थिति विपरीत है.
किसी भी एक दल में कांग्रेस की तरह राष्ट ्रीय प्रभाव नहीं है इसीलिये जाे़डताे़ड की सरकार बन रही है और गठबंधन चल भी रही है. लोहिया जी ने जिस राष्ट्रीय सराकर की कल्पना क्ेस्त्र० में की थी वह आज सराकर हो रही है. वैसे भी अटलजी की यह युक्ति याद आती है कि रोटी को जितनी बार पलटोगी उतनी ही अच्छी सिंकेंगी. वही अब हो रहा है. आज छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार चाहे गाय बैल बांटे चरणापादुका से आविवासियों का पूजन कर ले.
नाई पेटी भी वितरित कर ले और अमृत नमक चखा दे,तो मतदाता पर कोई असर नहीं पड़ेगी. परंतु इस प्रचलित सिध्दांत के कुद अपवाद भी होते हैं, जो पश्चिम बंगाल में दिख पड़ता है, केरल, मणिपुर में भी एक लंबे समय से सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ पश्चिम मंे तो ज्योति बसु नेहरूजी सिध्द हुए जो लगातार पच्चीस वर्षों से साम्यवादी सरकार को कायम रख सके. और आज भी वहां साम्यवादी सरकार ही चल रही है. इसका कारण तो हमें सिर्फ यह लगता है कि राजनीतिक विचारधारा की टकराहट से मतदाता अनभिज्ञ रहता है. इसके अलावे सत्ता में बना रहने के लिये शासन को कुछ बुनियादी सुधार करना पड़ता है बंगाल में ज्योति बसु की ग ी कायम रहने का राज यही बताया जाता है कि उन्होंने भूमि सुधार के लिये बहुत काम किया. छत्तीसगढ़ में रमन जी की सरकार के लोक लुभावने काम सामने आना चाहिये. आदिवासी और अनुसूचित जाति की कन्याआें को मुफत साइकिल बांटकर वे बस्तर और सरगुजा के मतदाताआें को जिनके नेता अभी सर्वाधिक असंतुष्ट है और यह कह रहे हैं कि यह आदिवासी विरोधी सरकार है, जबकि आदिवासियों की ताकत पर ही यह पार्टी शासन में आयी है, कितना रिझा सकते है यह समय ही बतायेगा.
छत्तीसगढ़: जहां देवता कभी नहीं सोते
भारत भूखंड में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां की मूल संस्कृति में श्रवण से लेकर कार्तिक मास तक के चातुर्मास में देवताआें के सो जाने अथवा इन चार महीनों में शादी विवाह जैसे कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए वाली बात लागू नहीं होती. यहां के मूल निवासियों के द्वारा कार्तिक अमावस्था को गौरा पूजा के रूप में मनाए जाने वाला भगवान शंकर तथा देवी पार्वती का विवाह पर्व इस बात का अकाटय प्रमाण है.
कार्तिक शु ल एकादशी को मनाया जाने वाला पर्व देवउठनी से उस दिन पहले कार्तिक अमावस्था को यहां गौरी पूजा का जो पूर्व मनाया जाता है. वह वास्तव में भगवान शंकर जिसे यहां ईसर देव,बू़ढा देव भी कहा जाता है, के साथ देवी पार्वती के विवाह के पर्व हैं. शंकर-पार्वती के विवाह पर्व को यहां प्रचलित विवाह के पारंपरिक रिति-रिवजों के साथ मनाया जाता है. तब प्रश्न यह उठता है कि या शंकर-पार्वती के विवाह में अन्य देवगण शामिल नहीं हुए थे? और यदि हुए थे तो फिर उनके सो जाने वाली बात कहंा तक सही है? अथवा देवउठनी के पूर्व कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करने की बात को यहां के संदर्भ में कैसे स्वीकार किया जा सकता है. छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति मंे पर्वों की दृष्टि से देखें तो श्रावण से लेकर कार्तिक तक का यह चार महीना ही सबसे महत्वपूर्ण महीना होता है, योंकि इन्ही चार महीनों में यहां मनाए जाने वाले सभी प्रमुख पर्वों का आगमन होता है. उदाहरण के लिए देखें- श्रावण मास में अमावस्या तिथि को हरेली पर्व, शु ल पक्ष पंचमी को नागपंचमी तथा पूर्णिमा को शिवलिंग प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. भादांे मास में कृष्ण पक्ष यह षष्ठ ी को स्वामी कार्तिकेय का जन्मोत्सव पर्व कमर छठ के रूप में, अमावस्या तिथि को नंदीश्वर का जन्मोत्सव पोला पर्व के रूप में, शु ल पक्ष तृतीया को देवी पार्वती द्वारा भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किए गए कठोर तप के प्रतीक स्वरूप मनाया जाने वाला पर्व तीजा तथा चतुर्थी को विघ्नहर्ता और देव मंडल के प्रथम पूज्य भगवान गणेश का जयंती पर्व. वांर मास का कृष्ण पक्ष हमारी संस्कृति में स्वर्गवासी हो चुके पूर्वजों के स्मरण के लिए मातृ एवं पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है, तो शु ल पक्ष माता सही शक्ति के जन्मोत्सव का पर्व नवरात्र के रूप में. शु ल पक्ष दश्मी तिथि को समुद्र मंथन से निकले विष का हरण पर्व दशहरा के रूप मंे मनाया जाता है तथा पूर्णिमा तिथि को समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रति पर्व शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इसी प्रकार कार्तिक मास में अमावस्या को मनाया जाने वाला भगवान शंकर तथा देवी पार्वती का विवाह पर्व गौरा पूजा में सम्मिलित होने के लिए लोगों को संदेश देने के लिए आयोजन युवा नृत्य के रूप मंे किया जाता है जो पूरे कृष्ण पक्ष में पंद्रह दिनों तक उत्सव के रूप में चलता है.
इन पंद्रह दिनों में यहां की कुंवारी कन्याएं कार्तिक स्नान का पर्व भी मनाती हैं. यहां की संस्कृति में मेला मड़ाई के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव पर्व भी कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ होता है जो भगवान शंकर के जटाधारी रूप मंे प्रागट्य होने के पर्व महाशिवरात्रि तक चलता है. श्रावण से लेकर कार्तिक मास तक के इन चार महीनां में इतना सब होने के बावजूद तब यह यों कहा जाता है की चातुर्मास में सपूर्ण देव मंडल सो जाता है इसलिए इन दिनों किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्यक्रम नहीं किया जाना चाहिए? या उपरोक्त तथ्यों के आधार पर इस धारणा को छत्तीसगढ़ की संस्कृति पृष्ठ भूमि में स्वीकार किया जा सकता है.
नकली दवाओं में नशीले पदार्थ का इस्तेमाल
पूरे बस्तर संभाग में लगभग े०० दवा दुकानें हैं. यदि शासन द्वारा तय मानदंडों के हिसाब से देखें तो इनकी चेकिंग के लिए छह ड्रग इंस्पे टरों की जरूरत पड़नी चाहिए, लेकिन इसे बस्तरवासियों की बदकिस्मती ही कहें कि इन सब दुकानों की चेकिंग के लिए पूरे बस्तर संभाग में एक भी ड्रग इंस्पे टर नहीं है. इस स्थिति में दवाआें के रख-रखाव के लिए बनाए गए कठोर नियमों का उल्लंखन करने से इनको कौन रोकेगा? नियमों की जानकारी देते हुए एक दवा दुकान संचालक ने बताया कि तय मानदंडों के हिसाब से रोज दवा की रैक साफ की जानी चाहिए,
जगदलपुर. बस्तर मंे नकली दवाआें की कितनी पैठ है इसका ठीक-ठीक अंदाजा लगाना किसी के लिए भी मुश्किल बात है लेकिन दवा दुकानों में नकली दवाआें की बिक्री से पूरी तरह से इंकार बिल्कुल नहीं किया जा सकता योंकि नकली दवाआें का पता लगाने में खुद विक्रेता भी असमर्थ हैं. उक्त विचार खुद विक्रेताआें ने दिए हैं उनका मानना है कि यह कारोबार काफी बड़े स्तर पर चल रहा है.
कुछ जानकारों से बात करने पर पता चला कि ज्यादातर उन दवाआें की नकल की जा रही है जिनमें रोग निवारण के लिए नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. एक निजी टीवी चैनल में भी इसे दिखाया है. नकली दवाआें में से ज्यादातर वे कफ सिरप थे जिनमें कोउी न की मात्रा ज्यादा होने से सेवन करने पर नशा होता है. चिकित्सा की दृष्टि से इन केमिकल्स की अच्छी महत्ता है पर दिन-ब-दिन इन दवाआें का नशे के रूप में प्रचलन होने से इनकी डिमांड पूरी करने नकली दवाईयां बनाई जा रही हैं. जिसमें नशीले पदार्थ के अलावा कोई और चीज का इस्तेमाल नहीं होता है. कफ सिरप के अलावा कुछ दर्द निवारक गोलियों का भी इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है.
यदि इस मसले को ध्यान से देखा जाए तो बहुत से चौकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं लेकिन इस विषय में प्रशासन द्वारा लापरवाह रवैया छाे़डकर प्रतिबद्धता से जांच कराई जाए तो लाईसेंस लेकर जहर बनाने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा. पूरे बस्तर संभाग में लगभग े०० दवा दुकानें हैं. यदि शासन द्वारा तय मानदंडों के हिसाब से देखें तो इनकी चेकिंग के लिए छह ड्रग इंस्पे टरों की जरूरत पड़नी चाहिए, लेकिन इसे बस्तरवासियों की बदकिस्मती ही कहें कि इन सब दुकानों की चेकिंग के लिए पूरे बस्तर संभाग में एक भी ड्रग इंस्पे टर नहीं है. इस स्थिति में दवाआें के रख-रखाव के लिए बनाए गए कठोर नियमों का उल्लंखन करने से इनको कौन रोकेगा? नियमों की जानकारी देते हुए एक दवा दुकान संचालक ने बताया कि तय मानदंडों के हिसाब से रोज दवा की रैक साफ की जानी चाहिए, यदि दवा की पैकिंग के ऊपर धुल की थाे़डी परत भी चढ़ जाए तो इसके लिए ड्रग इंस्पे टरफाईन कर सकता है,बशर्ते अफसर ईमानदार हो. खैर आज की दुनिया में ईमानदारी की बात करना सबसे बड़ी बेईमानी होगी, इसलिए तो संभाग के ड्रग इंस्पे टर नीलाम्बर सेठ जगदलपुर में आठ माह पहले दबिश देकर तीन दुकानों से नकली दवा पकड़ने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. हाल ही में बस्तर से सटे सीमावर्ती उड़ीसा राज्य के बोलांगिर में कराे़डों रूपए के नकली दवाआें की जब्ती करने के पश्चात वहाँ के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दोषी पाए गए रसूखदार व्यक्तियों का सिंडीकेट छत्तीसगढ़ तकफैला हुआ है. ऐसे में ड्रग इंस्पे टर का पद जितना संवेदनशील होना चाहिए उतना ही लापरवाह हो चला है. बस्तर संभाग में पिछले कई दिनों से एक ड्रग इंस्पे टर की मांग की जा रही है परंतु प्रशासन उदासीन नजर आ रहा है.
राख के ढेर में शोला
भी है, चिंगारी भी!
उन नाराज विधायकों को जो प्रदेश सरकार के कामकाज से असंतुष्ट होकर दिल्ली गुहार लगाने गए थे, पिछले दिनों अंबिकापुर में संपन्न हुई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में जमकर फटकार खानी पड़ी. अब यह असंतुष्ट नाराज नहीं बल्कि दु:खी हैं. सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर मात खाने के बाद अब इनकी नाराजगी दुख में तब्दील हो गई है.लेकिन उनके दुख को कौन जाने. किसी के दुख पर भला कौन दुखी होता है. बकौल शायर
किसी के रोने पे कौन रोता है दोस्त सबको अपने रोने पे रोना आता है. विरली ही आत्माएं होती हैं जो किसी के दुख से दुखी हों. अब विधायकों का दुख कौन जाने. सत्ता प्राप्ति को कमोबेश साढ़े तीन-चार साल गुजर चुके हैं. इस बीच जनता भी अपने विधायकों सांसद दो को बखूबी परख चुकी है. इसीलिए जनता भी अपने नेताआें के दुख से दुखी नहीं होती. हां, स्वार्थी तत्वों को अपने नेताआें को दुख से दुख जरुर होता होगा, योंकि गुर्गे अच्छी तरह जानते समझते हैं कि जब तक अपने नेता की पूछ परख है, तब तक सरकार दरबार में उनकी भी तूती बोलती है. आखिर नेताजी के बर्दहस्त से ही तो कमा खा रहे हैं. और जब नेताजी की ही. कोई पूछ परख नहीं होगी, तो उन्हेंं कौन पूछेगा. रही बात अफसरों की, तो वह भी तभी तक पूछ परख करते हैं, जब तक नेताजी के हाथ में सत्ता की बागडोर रहती है, फिर उसके बाद तू कौन और मैं कौन? इस मुल्क में सबसे ज्यादा अवसरवादी कोई है तो वह है अफसरशाही. अफसर किस तरह अपना रंग बदलते हैं, उसे देखकर तो गिरगिट भी मात खा जाएं. इसलिए गुर्गे जानते हैं कि उनकी बिसात नेताजी से ही है. जब नेताजी पंगू हो गए तो उन्हें कौन पूछेगा. मगर दिक्कत यह है कि नेताजी के दुख को कौन जाने. अब नेताजी खुलकर यह बात तो कह नहीं सकते कि चार साल गुजर गए, अब तक कोई असरदार पद नहीं मिला, कम से कम बचे हुए एक साल में ही कोई ऐसा पद दे दो. सारी विधायी इंतजार में ही चली गई. अब अगली बार तो सरकार आने से रही. जिन लोगों को अब तक मलाई मारने का अवसर मिल चुका है, उन्हें किनारे कर नए लोगों को मलाई मारने का अवसर मिलना चाहिए. तीन-तीन बार सरकार में फेरबदल हो गया. जो जैसे थे की मुद्रा में हैं तो औरों का या होगा? अगर अब नहीं तो कब?
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में फिर अनुशासन की तलवार लहरा उठी. असंतुष्ट ों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा गया कि बेटा, यदि यह गतिविधियां नहीं रूकी तो सारी मेहनत बेकार चली जाएगी. सत्ता में आलोचनाएं होती हैं, इसका समाधान घर बैठकर किया जा सकता है. 'आदिवासी ए सप्रेस` पर बैठकर दिल्ली जाने की या जरुरत थी. इसलिए आपकी हद में रहो और अगला चुनाव जीतना ही है. कौन सा मुंह लेकर जनता के सामने जाएंगे. अब हर विधायक के नसीब में खैरागढ़ और मालखरौद थोड़ी न लिखा है. पार्टी का असंतोष और जनता की भावनाआें पर खरा न उतरने का दुख. अब इसका खुलासा तो समय आने पर ही होगा न. बटोरने वाले तो दोनों हाथों से बटोर रहे हैं और जो न बटोर सके, वे दुखी हैं.
कांग्रेस में भी अंतर्कलह
गुटबाजी और अंतर्कलह प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में भी कुछ कम नहीं है. एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी हैं तो दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष चरणदास महंत हैं, राष्ट ्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा हैं, नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा हैं, उपनेता भूपेश बघेल हैं और भी न जाने कितने ही गुट तो जिला स्तर पर ही हैं.
कांग्रेस का ताजा बवंडर यह है कि कांग्रेस छोड़कर अन्य दलों में गए नेताआें की घर वापसी जोगी खेमे को रास नहीं आ रही है. मामला विद्याचरण शु ल से लेकर कांकेर के पूर्व कांग्रेसियों का हो चाहे कोरबा के पूर्व कांग्रेस नेताआें का. इस मु े को लेकर अब श्री महंत जोगी खेमे के निशाने पर आ गए हैं. जोगी खेमे का कहना है कि कई मोर्चे पर हार की खींझ मिटाने इस तरह की तिकड़मबाजी करना महंत खेमे की पुरानी आदद रही है. श्री जोगी स्वयं दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताआें से मिलकर श्री महंत की कोई शिकायत करने से नहीं चूकते. श्री जोगी का स्पष्ट आरोप है कि महंत जिन लोगों से घिरे हैं, वे स्वयं कांग्रेस के निष्ठ ावान लोग नहीं हैं. चुनाव में पराजित लोगों को कांग्रेस प्रवेश कराकर वे पार्टी को मजबूत करा रहे हैं या खोखला, इसका पता तो आने वाले चुनाव में ही लगेगा. यदि कांग्रेस का भीतरी अंतर्कलह इसी तरह उजागर होता रहा तो आसन्न चुनाव में उसे सत्ता प्राप्ति के सपने देखने का मोह त्यागना होगा, और छत्तीसगढ़ में आगामी चुनाव के परिणाम झकझोरने वाले होंगे.
शराब और सट्ट े के खिलाफ महिलाएं लामबंद
प्रदेश में फैली सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए सरकार कुछ करे चाहे न करे, महिलाएं जरुर लामबंद हो रही हैं. राज्य के अनेक क्षेत्रों में इन दिनों अवैध शराब और सट्ट े के खिलाफ गांव-गांव में महिलाआें ने कमर कस ली है. वे सट्ट ा खाईवाल और शराब कोचियों को बुलाकर उनके काम उमड़ रही हैं कि बच्चू यह अवैध कारोबार जनती जल्दी हो सके बंद कर दो, अन्यथा तुम्हारी खैर नहीं. कई गांवों में तो महिलाआें ने घर-घर जाकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता लाने का प्रयास किया है. शराब और सट्ट े के कारोबार से परेशान अब महिलाएं अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए भी एकजुट हो रही हंै. महिलाएं अवैध कारोबार के प्रति चेतना जागृत कर लोगों को यह बता रही हैं, इससे गांव घर की शांति भंग होती है और महिलाआें बच्चों को प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ रहा है. ऐसी ही एक रैली पिछले दिनों भिलाई-फ् के समीपस्थ गांव गनियारी में निकाली गई, जिसका नेतृत्व गांव की पार्षद श्यामा कोसरे और युवा भाजपा नेता प्रेमलाल साहू ने किया. इस प्रदर्शन रैली को सर्वत्र सराहना भी बेनकाब मिली. लेकिन इन महिलाआें को उन नेताआें और पुलिस वालों का घेराव भी करना चाहिए जो इस अवैध कारोबार को संरक्षण और बढ़ावा देते हैं.
मंदिरों की नहीं, शौचालयों की जरुरत
प्रदेश में यह अच्छी खबर आई है कि राज्य के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्र में शौचालय होगा. यह घोषणा की है लोक निर्माण यांत्रिकी राज्यमंत्री केदार कश्यप ने. यह बात उन्होंने संपूर्ण स्वच्छता अभियान पर रायपुर में ख्फ् जुलाई को आयोजित छह दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से एक साल के भीतर प्रदेश के सभी विकासखंडों के हर गांव और प्रदेश के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी को शौचालययुक्त बनाना है. बनाना ही नहीं बल्कि उनका शत-प्रतिशत उपयोग भी कराना है. यह सरकार की अच्छी सुध है. देर से ही सही, पर वह चेती तो सही, आज से क्भ् साल पहले सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार स्वर्गीय कमलेश्वर ने कहा था कि देश में जिस संख्या में मंदिर हैं, उस अनुपात में शौचालय नहीं है. इससे लोगों को अत्याधिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. दरअसरल वे मार्के की बात कह गए. शहरों की मलीन बस्तियों और रेल पटरियों के किनारे से लेकर गांव के मे़ढों तक लोगों को अपनी आबरू उधे़डकर शौच से निवृत्त होने के लिए मजबूर होना पड़ता है. खासकर महिलाआें और बच्चियों को अपने पेट में उठते मरोड़ के बावजूद किसी राहगीर के लिए पेट पकड़कर खड़े होने को विवश होना पड़ता है. यह विडंबना नहीं तो और या है कि उसी गांव बस्ती के हर दूसरे मोड पर किसी न किसी भगवान का मंदिर तो बना मिल जाएगा, लेकिन शौच से निवृत्त होने के लिए लोगों को गांव बस्ती से दूर कोई कोना तलाशना पड़ता है. यह शिक्षा, जागरूकता का ही अभाव है कि लोग सड़क किनारे भगवान को पाने का अंधविश्वास पाल लेते हैं, लेकिन अपनी बहू बेटियों की इज्जत बचाने के लिए शौचालय को महत्व नहीं देते. मंदिर तो गांव बस्ती में केवल एक ही काफी हैं, जबकि शौचालय की जरुरत घर घर में है. जाने कब लोगों को यह अकल आएगी. भला हो उस प्रभु का, जिसने सरकार के इस मंत्री को तो यह अकल दी.
पत्रकार का शब्दबाण
पत्रकार वही जो खबर को कहीं भी सूंघ ले. खबर पाने के लिए उसे हमेशा अपना नाक, कान, आंख खुली रखनी चाहिए. पिछले दिनों एक प्रशासनिक अधिकारी से मिलना हुआ. चर्चा में बात पत्रकारिता और पत्रकारों की प्रतिबद्धता की निकल आई. अधिकारी ने बातचीत में कहा कि शहर में तो एक ही पत्रकार हैं जो ऊंची पहुंच रखता है और सम्मान का पात्र है. जाहिर है इससे हमेंं जिज्ञासा होनी ही थी. नाम पूछने पर उस अधिकारी ने जो नाम बताया, उसे सुनकर तो हमारे होश ही फाख्ता हो गए, योंकि उसने जो नाम बताया पत्रकारिता जगत में वह बमुश्किल दो दिन पहले ही अंडे से बाहर आया चूजा था. पर इससे हमें उस अधिकारी की सोच और मानसिकता का तो पता चल ही गया. उस अधिकारी का पत्रकारों से हमेशा पाला पड़ता रहता है.
कांग्रेसी नेताओं की इस्पात राज्यमंत्री से मुलाकात
दुर्ग. दुर्ग विधान सभा के पूर्व विधायक श्री अरूण वोरा, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षी श्री घनाराम साहू, भिलाई नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सीजू एंथोनी ने दिल्ली जाकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट ्रीय कोषाध्यक्ष श्री मोतीलाल वोरा से मुलाकात कर जिले की राजनीति से अवगत कराया. श्री मोतीलाल वोरा का समर्थन प्राप्त कर जिले में उन्हें शीघ्र प्रवास पर आने का निमंत्रण भी दिया. उन्होंने स्वीकार कर आश्वासन दिया कि वे निकट भविश्य में दुर्ग जिले के प्रवास पर आऐगे. इसी दरम्यान टी.ए. एवं टी.ओ.टी.के ्रप्रशिक्षित छात्र जो पिछले क्० वर्षों से बी.एस.पी. मंे नियुक्ति की राह देख रहे हैं की समस्याआें से श्री मोतीलाल वोरा को अवगत कराया तथा शीघ्र ही इन प्रशिक्षित छात्रों कों नियुक्ति दिलवाने हेतु पहल करने की मांग की उन्हंे बताया गया कि टी.ओ.टी. के कुल भ् बैच थे जिसमें से ब् बैच की एंव भ् वे बैच के आधे लोगों की नियुक्ति हो चुकी है सिर्फ ओध लोग बचे है उन्हें तत्काल नियुक्ति दी जाए. पूर्व विधायक अरूण वोरा, घनाराम साहू एवं नेता प्रतिपक्ष सीजू एंथोनी के नेतृत्व में श्री मोतीलाल वोरा के मार्गदर्शन में इस्पात मंत्री श्री अखिलेश दास से मुलाकात की तथा टी.ए. तथा टी.ओ.टी. के छात्रों की लंंबित नियुक्ति हेतु चर्चा की. इस्पात मंत्री ने बी.एस.पी. के प्रबंध निदेशक श्री आर.रामाराजू से दूरभाष पर सीधी चर्चा कर नियुक्ति संबंधि स्पष्ट निर्देश दिया कि इन प्रधिक्षित छात्रों की समस्या का समाधान करंे साथ ही इस्पात संयंत्र के निदेशक कार्मिक श्री गणतंत्र ओझा को भी दिशा निर्देश देकर सभी अड़चनों को समाप्त कर नियुक्ति देनेका निर्देश दिया. इसके अलावा छत्तीसगढ़ के प्रभारी सचि श्री मुकुल वासनिक से भी चर्चा कर संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा की.
सारी अपेक्षाएं स्कूली शिक्षा से ही यों?
चतुरानन ओझा
एनसीईआरटी ने यौन शिक्षा नाम से एक कार्यक्रम तैयार किया है. इसके लिए उसे यूएनओ सहित वैश्विक संस्थाआें का सहयोग प्राप्त है. इस विषय पर तमाम सरकारी गैरसरकारी स्तर पर प्रचार-प्रसार होता रहा है. शील-संकोच एवं लज्जा जैसे समाज के विकासक्रम में हजारों वर्षों के दौरान निर्मित मनोभावों को एवं समाज को नियंत्रित एवं अनुशासित करने में उसकी सकारात्मक भूमिका को खारिज करते हुए बेलगाम भोग-संभोग करते रहने के सुरक्षित उपाय बताए जाते हैं. इन सबसे शासक वर्ग के नियताआें का मन नहीं भरा. इन सभी स्वेच्छाचारी गतिविधियों पर मुहर लगाने के लिए इसे शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से किशोर वय के बीच ले जाना आवश्यक है. आज शिक्षा एवं समाज के नियामक कहलाने वाले लोग यही कर रहे हैं यौन शिक्षा के नाम पर. वस्तुत: शिक्षा के व्यवसायीकरण व्यवसायिक शिक्षा और कुल मिलाकर शिक्षण संस्थाआें का निजीकरण करके उन्हें भारी मुनाफा कमाने वाले उपक्रमों के रूप में बदले जाने से इस क्षेत्र में एक डरावना माहौल पैदा हुआ है. इसमें एक तरफ मध्यवर्गीय व्यक्तिवादी महत्वकांक्षाआें को चरम पर पहुंचाया है. वहीं शिक्षा व्यवस्था से ढेरों ऐसी अपेक्षाएं भी जगा दी है जिसे पूरा करना उसका काम नहीं है. इसमें प्रमुख है रोजगार परक शिक्षा विशेषज्ञ भी जानते हैं कि रोजगार देना अर्थव्यवस्था का काम है न कि शिक्षा का. किंतु इसे प्रचारित कर शिक्षा का व्यवसाय तेजी पर है.
हम भी किसी से कम नहीं
भिलाई. उच्च तापमान, और भारी भरकम मशीनों के बीच लौह एंव इस्पात उत्पादन के जटिल और जोखिम भरे काम के बीच किसी महिला कर्मी के कार्य करने की कल्पना ही उस महिला के साहस और कठोर व्यक्तियों को स्पष्ट कर देता है. भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस जिसे किसी भी एकीकृत इस्पात संयंत्र का हदय कहा जाता है में भी महिला कर्मी पूरे लगन और साहस के साथ वर्षों से कार्य कर रही है. अब तो वे इसे छाे़ड कर कहीं और नहीं जाना चाहती है. इनका कहना है कि ये अब हमे अपने घर जैसा ही लगा है.
चार पुत्रियों और एक पुत्र की माता श्रीमती संगीता सिंहा ब्लास्ट फर्नेस मंे क्ेेफ् से कार्यरत है. इनका पति की क्ेत्त्त्त् में निधन होने पर इन्हें कंम्पनशेन आधार पर संयंत्र में नौकरी मिली थी और प्रारंभ से ही ये ब्लास्ट फर्नेस में पदस्थ है. शुरू-शुरू में ब्लास्ट फर्नेस से डर लगता था किंतु अब तो अच्छा लगता है. इनका कहना है कि जरूरत के समय यहां के लोगां ने ही मुझे सहारा दिया और कभी भी कोई पेरशानी नहीं आई. मेरे साथ पूरा सहयोग बना रहा है. आज तक किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ा अपने घर जैसा ही लगता है.
इनके साथ ही श्रीमती बी पद्मा है. इनके पति भी ब्लास्ट फर्नेस में कार्य करते थे और क्ेत्त्स्त्र में इनके निधन के बाद इन्हें नियुक्ति मिली. श्रीमती पद्मा कहना है कि ख्० वर्ष हो गये है मुझे ब्लास्ट फर्नेस मंे काम करते हुए आज तक कोई भी परेशानी नहीं आई है. पुरानी बातों को स्मरण कर भर अये गले से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मैं ब्लास्ट फर्नेस कोक कभी नहीं भूल पाउंगी. जब मेरे पति का निधन हुआ मेंरे बच्चे छोटे थे तब ब्लास्ट फर्नेस के लोगों ने मुण्े और मेरे बच्चों को परिवार वालों की तरह सहारा दिया है. यहां हमे कभी किसी प्रकार का भय नहीं लगा और न ही कोई तकलीफ हुई है. अब यहां की अच्छा लगता है. रिटायर होने तक यही रहना चाहती हूँ.
दिन भर डाक लेकर इधर से उधर जाने और जरूर पडने पर ब्लास्ट फर्नेस के प्रचालन क्षेत्र में भी जाना पडता है श्रीमती शांति बाईर् को. पांच वर्ष पहले संयंत्र की दल्ली राजहरा खदान से ट्रांसफर पर आई है. कहती है कि शुरू-शुरू में थाे़डा- थाे़डा डर लगता था. अब तो घर जैसा लगता है. नौकरी के कुछ साल बाकी है शरीर साथ देगा तो बाकी समय भी यही गुजारना चाहती है शांति बाई. नारी किसी से भी कम नहीं है कि कहावत को यहां साफ महसूस किया जा सकता है. ये चारों महिलाए प्रत्यक्ष रूप से प्रचालन क्षेत्र से नहीं जु़डी है लेकिन ब्लास्ट फर्नेस क्षेत्र में कार्य करने का इनका रोचक अनुभव इन्हें एक सशक्त व्यक्तित्व का मालिक बनाता है. पुरूषों के साथ बराबरी से मिलकर काम करना और संयंत्र की बेहतरी में योगदान अब इनकी फितरत सी हो गई. कहा जाता है कि लौह एवं इस्पात का उत्पादन करना बच्चों का खेल नहीं है.
भिलाई इस्पात संयंत्र के समाचार
गरीब बच्चों के स्कूल को सराहा ओझा ने
भिलाई. स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड सेल के निदेर्श कार्मिक श्री गणतंत्र ओझा ने अपने दो दिवसीय व्यस्त प्रवास के दौरान ख्क् जुलाई,ख्००स्त्र को भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा भिलाई क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों के बच्चों के लिये इस्पात नगरी के से टर-म् में भिलाई इस्पात विकास विद्यालय के नाम प्रारंभ की गई एक सर्वसुविधायुक्त प्राथमिक शाला का अवलोकन किया और संयंत्र के प्रयासों की सराहना की. इसके साथ ही श्री ओझा ने तीन पृथक-पृथक बैठकों में संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, विगत वर्ष में प्रबंधकीय प्रशिक्षुआें के रूप में सेवा प्रारंभ करने वाले कनिष्ठ अधिकारियों तथा परियोजना विभाग में नियुक्त कनिष्ठ प्रबंधकों से विचार-विमर्श किया.
अपने प्रवास के दुसरे दिन श्री गणतंत्र ओझा ने प्रात: संयंत्र द्वारा चलाये जा रहे स्कूल का अवलोकन किया और अध्ययनरत् बच्चांे से बातचीत भी की. भिलाई इस्पात विकास विद्यालय में श्री ओझा ने बच्चों को सफेद शाला गणवेश स्कूल यूनीफार्म वितरित किया और उन्हें मिठाई भी विखाई. श्री ओझा ने शाला के डायनिंग रूम, सिक रूम, प्ले ग्राउंड और लास रूम का निरीक्षण कर शाला की व्यवस्था और उउसकी पढ़ाई के स्तर की सराहना की. श्री ओझा ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र का यह प्रयास बहुत अच्छा लगा. इसमें काफी मेहनत की गई है. इस अवसर पर श्री ओझा के साथ संयंत्र के कार्यपालक निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन श्री पीके अग्रवाल, महाप्रबंधक मानव संसाधन विकास श्री एस एन सिंह, उप महाप्रबंधक प्रभारी संपर्क एवं प्रशासन श्री भूपिंदर सिंह, उप महाप्रबंधक प्रभारी नगर सेवाएं श्री डी एम जलतारे और शिक्षा प्रमुख री संजय कुमार सहित संयंत्र के अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे.
इसके पश्चात निदेशक कार्मिक श्री गणतंत्र ओझा ने अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में भाग लिया. इस बैठक में संयंत्र के कार्यापालक निदेशक व र्स श्री ए के जैन, कार्यपालक निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन श्री पी सेवाएं श्री डी एम जलतारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे. इसी कड़ी में श्री ओझा ने विगत वर्ष में प्रबंधकीय प्रशिक्षुआें के रूप में सेवा प्रारंभ करने वाले कनिष्ठ अधिकारियोंें तथा परियोजना विभाग में हाल ही में नियुक्त कनिष्ठ प्रबंधको से विचार-विमर्श किया और उनके प्रशिक्षण, नागरिक सुविधाआें,कार्य संस्कृति एवं वातावरण पर चर्चा की तथा कंपनी की बेहतरी के लिय या सुधार किये जा सकते हैं, इस पर उनके विचार से अवगत हुए.
इसके पूर्व श्री गणतंत्र ओझा ने संयंत्र के प्रबंध निदेशक श्री रामराजू से मुलाका की और संयंत्र की विभिन गतिविधियों पर गहन चर्चा की. इस अवसर पर संयंत्र कार्यपालक निदेशक व र्स श्री एस के जैन, कार्यपालक निदेशक वित्त एवं लेखा श्री पी के गुप्ता, कार्यपालक निदेशक सामग्री प्रबंधक श्री एस एन सिंह, कार्यपालक निदेशक खदान श्री एन के मेसन, कार्यपालक निदेशक परियोजनाएं श्री व्ही के अरोरा. कार्यपालक निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन श्री पी के अग्रवाल ने भी चर्चा में भाग लिया. दो दिन के व्यस्त प्रवास के बाद श्री ओझाा नियमित विमानसेवा से संध्या नई दिल्ली के लिये रवाना हुए.
एचएससीएल कर्मियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नहीं मिला
भिलाई. एचएससीएल कर्मचारी यूनियन (इंटक) के अध्यक्ष रोबिन दत्ता ने केंद्रीय इस्पात मंत्री रामविलाप पासवान से मांग की है कि एचएससीएल में कार्यरत कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जनवरी क्ेेे से लगातार नियमानुसार जनवरी ख्००स्त्र तक वृद्धि हुआ, लेकिन प्रबंधन ने अभी तक कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता का वितरण नहीं किया है. उसी प्रकार वेतन विविजन (पांचवा वेतन) उसका एरियस भी अभी तक कर्मचारियों की नहीं दिया गया है. रोबिन दत्ता ने कहा है कि छठवां वेतन विविजन का समय आ गया है. दत्ता ने इस्पात मंत्री से ये भी मांग की कि एचएससीएल में कार्यरत कर्मचारियों का सेवानिवृत्त होने की आयु भ्त्त् से बढ़ाकर म्० वर्ष किया जाए योंकि इस्पात मंत्रालय के आधीन सभी निकाय का सेवनिवृत्त आयुक्त म्०
वर्ष है.
मित्रसभा का आयोजन
भ् सितंबर को
बीएसपी हायर सेकेण्डरी स्कूल से टर-क्, भिलाई से पढ़े हुए सभी सदस्यों को सन स्त्र० से े० के बैच भ् सितंबर ख्००स्त्र से टर-क्, हायर सेकेण्डरी स्कूल में मित्रसभा द्वारा आमंत्रित किया जाता है.
निगम क्षेत्र में सड़कों की हालत खस्ता
भलाई. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सलाहकार एसपी खान ने कहा कि नगर निगम भिलाई ने शहर के विकास के लिए काग में कोई कमी नहीं छोड़ी. सड़कों की हालत देख कोई भी राहगीर सोचने को मजबूर हो जाता है, मैं किसी शहर में हूं कि गांव में.
सुपेला चौक से लक्ष्मीनगर मार्केट होते हुए फरीद नगर चौक हो या राधिका नगर की सड़या या फिर बजरंग पारा कोहका की सड़कों का हाल बेहाल है. सुपेला पुरानी सब्जी मार्केट से लेकर रावण भाठा तमाम नालियां जाम हैं, उसी तरह बजरंग पारा कोहका की प्रमुख नालियां कई दिनों से साफ नहीं हो पाई है. उनसे उठती बदबू चारों ओर गंदगी, ये कुछ बानगी है नगर निगम भिलाई की.
डा. खान ने कहा कि शहर के विकास के लिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. चारों तर किए गए कार्य भ्रष्ट ाचार को उजागर कर रहे हैं. भाजपा ने निर्धन कन्या विवाह करवाया, जबकि इसमें शासन एवं प्रशासन की भूमिका रही, फिर भी फर्जी विवाह करवाकर एक अनूठा रिकार्ड अपने नाम नगर निगम भिलाई ने किया. ऐसे अनेक उदाहरण हैं. गुमठी बनकर कब की तैयार हो चुकी है. उसमें जंग लग रहा है परंतु निगम आयुक्त मात्र कठपुतली बन कार्य कर रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते कड़े़ कदम उठाने चाहिए परंतु वे भी मौन हैं. वार्ड ख्म् बसंत टाकिज से लेकर टूट चुकी विजय टाकिज के बीच एक मोहल्ल सूर्या नगर के सामने का मैदान शहर के बीचों बीच कचरे का डंप यार्ड बन गया है. उसमें से उठती बदबू और बरसाती बीमारियों का संक्रमण वहां के रहवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. या आयुक्त महोदय अपने कुंभकर्णी नींद से जागेंगे.
अंत में डा. खान ने कहा कि जब शासन निरंकुश हो जाता है, तो जनता बेबस होकर नहीं देख सकती, ऐसे में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग अपने दायित्व का निर्वहन कर सड़क पर उतरेगी, और नगर निगम भिलाई के खिलाफ जनआंदोलन छे़डेगी. जनता का मूलभूत अधिकार है कि उसे सही सेवा प्रदान करें. कोई पार्टी इससे विमुख होत हैं, वक्त आने पर जनता उनके काम का आईना दिखाती है. लगता है कि भिलाई नगर निगम ने भ्रष्ट ाचार से समझौता
कर लिया है.
पत्रकार से दुर्व्यवहार करने वाले को गिरफ्तार करें
भिलाई. दुर्ग जिला लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष श्यामलाल गौतम एवं विश्वकर्मा समाज कल्याण केंद्र के अध्यक्ष सुभाष शर्मा ने शहर के मनचले लोगों एवं पुलिस द्वारा पत्रकारों का अपमान किये जाने की कडे शब्दों में निंदा की है.
ज्ञातव्य हो कि न्यू बसंत टाकिज के प्रबंधन एवं पुलिस द्वारा विगत दिनों एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ गाली-गलौच एवं अभद्र टिप्पणी किया जाना एक गंभीर घटना है.
वहीं एक समाचार पत्र के पत्रकार के साथ भी इसी तरह की घटना हुई जिसकी कड़े शब्दों में निंदा करके साथ ही ऐसे तत्वों की गिरफ्तारी की मांग की गई.
मांग करने वालों में रघुनंदन शर्मा, अशोक जसवारा, जयलाल खरे, वृंदावन सोनी, योगेंद्र पांडेय ख्वाजा भाई, ओमप्रकाश सिंह, विनोद सिंह, चंद्रकांति गुप्ता इत्यादि शामिल हैं.
संयंत्र ने वनांचल के बच्चों को गोद लिया
भलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपनी निगमित सामाजिक जिम्मेदारी के निर्वहन और पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने की अपनी अनूठी पहल के तहत इस वर्ष भी ख्० और बच्चों को गोद लिया जा रहा है. पिछड़े वनांचल क्षेत्र के प्रतिभावान ख्० बच्चों में से क्स्त्र बच्चे अब तक आ चुके हैं और शेष फ् बच्चे भी शीघ्र आ जाएंगे.
भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंध निदेशक रामराजू को स्वयं भी बच्चों के प्रति बहुत संवेदनशील है और बच्चों के सर्वांगीण विकास में स्वत: रुचि दिखलाते हैं ने भी इन ब च्चों के भिलाई की शालाआें में प्रवेश के प्रति अपनी रुचि दिखलाई है. हाल ही में प्रबंध निदेशक ने संयंत्र द्वारा भिलाई क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों के बच्चों के लिए प्रारंभ की गई एक सर्वसुविधायुक्त प्राथमिक शाला भवन का निरीक्षण किया और बच्चों से रुबरु होकर उनसे आत्मीय चर्चा की. बच्चों से उनकी रुचि, उनके लक्ष्य और पारिवारिक स्थिति की चर्चा के साथ बच्चों को आगे बढ़ने तथा पढ़ने के लिये अभिप्रेरित किया.
भिलाई इस्पात संयंत्र ने वर्ष ख्००फ्-०ब् में इस योजना को प्रारंभ करते हुए ब्० बच्चों को गोद लेने का निर्णय लिया था जिसमें से फ्फ् बच्चे भिलाई आये. वर्ष ख्००ब्-०भ् में ख्० और ख्००भ्-०म् में ख्० बच्चों को गोद लिया गया है. इस तरह अब तक कुल ेख् बच्चों को गोद लेकर संयंत्र इनका संपूर्ण लालन-ालन कर रहा है और उन्हें अंग्रेजी माध्यम में श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने का प्रयास कर रहा है. कक्षा म्वीं से कक्षा क्क् वीं तक पढ़ रहे इन बच्चों को दुर्ग जिले के विभिन्न गांवों से लिया गया है.
हाल में आये क्स्त्र बच्चों में से क्० बच्चों ने भिलाई विद्यालय में कक्षा म्वीं में प्रवेश लेकर शाला जाना भी प्रारंभ कर दिया है. इनमें मनोज, महावीर, अमित कुमार, महेश कुमार, भूपेन्द्र कुमार, गितेश्वर, ईसा-ईशा प्रकाश, राकेश, नीलम कुमार, विकास कुमार, चंद्रशेखर, ज्ञानेश्वर, प्रकाश कुमार, हितेश, दिग्विजय, गोपीचंद और नरेन्द्र कुमार शामिल हैं. ये सभी बच्चे दुर्ग जिले के करिया टोला, बड़ा जुगेरा, बोहारडीह, मैथली, तरैद, गुरुर, कोसमी, कंकालीन, सीता पठार, भेसबोड़, सिकारोटोला और पटेली गांव के हैं. अब तक भिलाई में भ्ख् गांवों के बच्चों को पड़ने का अवसर मिला है. इन बच्चों का चयन जिला प्रशासन की जानकारी में कक्षा भ्वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाता है. मेधावी और प्रतिभावान किन्तु साधन विहीन और जरुरतमंद बच्चों को ही संयंत्र गोद लेकर इनका लालनन-पालन कर
रहा है.
पुरैना की समस्याओं के निदान पर विधानसभा अध्यक्ष का आभार
भिलाई. अखिल भारतीय उड़िया समाज के अध्यक्ष केदारनाथ महानंद ने नगर निगम भिलाई के अंतर्गत वार्ड क्रमांक म्म् स्टोर पारा पुरैना में वर्षों पुरानी मांग बिजली समस्या के निदान पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि स्टोरपारा एक श्रमिक बाहुल्य बस्ती है, वहां बीएसपी और रेलवे ने पुरैना की भूमि पर अधिकार जमा कर यहंा के नागरिकों को उनके अधिकार से वंचित कर दिया था. इससे यहां के श्रमिक जनसुविधाओ से वंचित होकर विसंगतियों में अपना जीवन काटने पर मजबूर हो गए थे.
कठिन परिश्रम करने के बावजूद अपने शरीर का पसीना सुखाने के लिए वह पंखा तक नहीं लगा पाते थे. बच्चे रात को पढ़ाई नहीं कर पाते थे.गंदगी से वहां संक्रमण बिमारियों का फैलाव होता रहता था. महानंद ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए पुरैना श्रमिक बाहुल्य बस्ती को जन समस्या का निराकरण कर विकास कार्यों को प्रारंभ करवाय आभार व्यक्त करने वालों मे जेए तांडी, साधु महानंद, नाग, रवियांत्रों, साधु महानंद, ओनादीकर, गिरी बाग सुुंदरलाल सोना आदि भी शमिल है.
पत्रकार से दुर्व्यवहार करने वाले को गिरफ्तार करें
भिलाई. दुर्ग जिला लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष श्यामलाल गौतम एवं विश्वकर्मा समाज कल्याण केंद्र के अध्यक्ष सुभाष शर्मा ने शहर के मनचले लोगों एवं पुलिस द्वारा पत्रकारों का अपमान किये जाने की कडे शब्दों में निंदा की है.
ज्ञातव्य हो कि न्यू बसंत टाकिज के प्रबंधन एवं पुलिस द्वारा विगत दिनों एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ गाली-गलौच एवं अभद्र टिप्पणी किया जाना एक गंभीर घटना है.
वहीं एक समाचार पत्र के पत्रकार के साथ भी इसी तरह की घटना हुई जिसकी कड़े शब्दों में निंदा करके साथ ही ऐसे तत्वों की गिरफ्तारी की मांग की गई.
मांग करने वालों में रघुनंदन शर्मा, अशोक जसवारा, जयलाल खरे, वृंदावन सोनी, योगेंद्र पांडेय ख्वाजा भाई, ओमप्रकाश सिंह, विनोद सिंह, चंद्रकांति गुप्ता इत्यादि शामिल हैं.
पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार की निंदा
भिलाई. पिछले दिनों एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार विमल शंकर झा अपने बच्चे को अस्पताल ले जा रहे थे. सुपेला चौक के पास एएसआई अशोक साहू ने उनकी गाड़ी को रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया. श्री झा के साथ हाथापाई भी की गई. संपूर्ण स्थिति से अवगत कराने के बाद भी श्री साहू का वही व्यवहार रहा. इससे विवाद काफी बढ़ जाने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संजीव शु ला तक मामला पहुंच गया. डॉ. शु ला ने घटनास्थल पर उपस्थित होकर स्थिति संभाली, तब जाकर मामला शांत हुआ. इस घटना से पत्रकार जगत आहत हुआ है. अखिल भारतीय पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ ईकाई ने इस घटना की कड़ी शब्दों में निंदा की है. संघ के अध्यक्ष विक्रम जनबंधु, सुनील वोहरा, राजेश वोरा, मारकण्डेय तिवारी, टी.पी. सिंग, आर.एस. मौर्य और अन्य पत्रकार साथियों ने मारपीट करने वाले पुलिस अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है.
शुक्रवार, 27 जुलाई 2007
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